आओ हम सब मिलकर हिंदी दिवस मनाएं

हमारी हिंदी का देखो दुर्भाग्य।
अंग्रेजी के चक्कर में लोग रहें त्याग।।
किस्मत का अजीब खेल देखो।
अभी भी है शेष समय शीघ्र तू जाग।।
करते हैं सभी जो नक़ल।
हिंदी बोंलने में हम शर्माते।।
सामने वालों को ऐसे दिखाते।
आता भले नही जी जान लगाते।।
स्वामी विवेकानंद जी ने जब शिकागो में।
हिंदी में दिए थे जब उद्बोधन।।
नतमस्तक हो गए थे तब लोग।
सुन कर उनके वो संबोधन।।
हमें नही है पता कि लोग।
हिंदी से क्यों हैं कतराते?
आए दिन क्यों जो लोग?
अपनी मातृ भाषा को ठुकराते।।
चेत जाओ अभी से भी।
लो मिलजुलकर संज्ञान।।
तभी तो पिता को डैड बोलते है।
वो ममी को कैसे देंगे सम्मान।।
भारतेंदु जी के सपने।
हो रही है धराशाई।।
अंग्रेजी के चक्कर में।
हिंदी को न भूलो भाई।।
आओ ले हम संकल्प।
हिंदी से नज़र न चुराएंगे।।
गर्व से हम बोलेंगे हिंदी।
तनिक भी न हिचकिचाएंगे।।
क्यों न मातृभाषा को सराखों पर सजाएं।
आओ हम सब मिलकर हिंदी दिवस मनाएं।।
......अभय सिंह