सोशल मीडिया मार्केटर, डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर, कंटेंट रणनीतिकारों की भूमिका डिजिटल प्रचार से बढ़ गई

प्रत्याशी व इनके लिए काम करने वाले फ्री हैंडलेस वर्कर तकनीकी सलाहकारों से राय लेने लगे हैं। सोशल मीडिया मार्केटर, डिजिटल मार्केटिंग मैनेजर, कंटेंट रणनीतिकारों की भूमिका डिजिटल प्रचार से बढ़ गई है। चुनाव प्रचार के लिए सोशल मीडिया तकनीकी प्रोफेशनल विभिन्न प्लेटफार्मस जैसे युट्यूब, फेसबुक, लिंकडिन, इन्सटाग्राम , जीमेल, वाट्सअप मैसेज- ग्रुप्स, टेलीग्राम, सिग्नल एवं ट्वीटर का प्रयोग प्रचार के लिए रैलियों पर रोक लगने से बढ़ेगा। सोशल मीडिया पर चुनाव प्रचार के लिए उपरोक्त तकनीकी विशेषज्ञ बताते हैं कि वह उम्मीदवार का प्रचार उनके वोटरों तक पहुंच सके, उसकी प्लानिंग को अलग-अलग केटेगिरी के हिसाब से बताते हैं। किस प्रकार के प्रचार का कौन सा पोस्टर, वीडियो या कौन सा कन्टेन्ट दिखाना है, प्लान करके वोटर को डिजिटल के माध्यम से पहुंचाते हैं।
एक समय में लोगों को कैटेगिरी करके अलग से एवं ग्रामीण लोगों को जरूरत के हिसाब से रिझा सकते हैं।
सोशल मीडिया विशेषज्ञ आसानी से राजनेताओं की डिजिटल रैलियां और बातें एक ही समय में महिलाओं, बच्चों, बुजुर्गों, व्यस्कों एवं युवाओं तक अलग से बेहद आसानी से पहुंचा सकते हैंं।
भौतिक रैलियों की अपेक्षा 10 गुना कम खर्च पर आसानी से वह डिजिटल के माध्यम से घर-घर कर सकते हैं प्रचार।
वर्चुअल रैली के लिए क्रिएटिव कंटेंट का उपयोग अहम हुआ है। फिजिकल रैलियों में नेता आराम से जनता को अपनी तरफ आकर्षित कर लेते हैं, परंतु वर्चुअल माध्यम में ऐसा कर पाना मुश्किल होता है।
कोरोना के कारण भौतिक रूप से रैलियों पर रोक लगने से चुनाव में डिजिटल प्रचार सबसे अच्छा तरीका है। नेता जिस वर्ग को संबोधित करना चाहते हैं या जिस क्षेत्र के लिए जनता को संबोधित करना चाहते हैं उस क्षेत्र में किए गए कार्यों को अपने संबोधन के दौरान बीच बीच में वहां की कुछ अच्छी इमेज, उनके छोटे-छोटे वीडियो पहले से बनाकर अपनी जनता को दिखाते रहे । जिससे जनता उनके संवाद से जुड़ी रहेगी और डिजिटल रैली आकर्षक बनी रहेगी।
आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस एक्सपर्ट कंप्यूटर विजन से चुनाव प्रचार करके प्रभावशाली बना सकते हैं। विपक्ष की आनलाइन रैली के वीडियो देखकर एक समीक्षा भी करना आसान होता है कि उनकी और हमारी रैली में कंटेंट में क्या अंतर है। इससे दूसरे डिजिटल सामग्री को और प्रभावशाली बनाकर अपने क्षेत्र की जनता तक पहुंचा सकते हैं। दूसरा फायदा यह भी है कि रैली में भीड़ जुटाने से यह पता नहीं चलता कि वह वास्तविक वोटर है भी या नहीं।