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उत्तर प्रदेश

दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर ताउम्र रोक हो या नहीं, संसद तय करेगी; केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा

दागी नेताओं के चुनाव लड़ने पर ताउम्र रोक हो या नहीं, संसद तय करेगी; केंद्र ने सुप्रीम कोर्ट से कहा
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केंद्र सरकार ने बुधवार को सुप्रीम कोर्ट में साफ कहा कि दोषी नेताओं पर आजीवन प्रतिबंध लगाने का फैसला सिर्फ संसद के अधिकार क्षेत्र में आता है. सरकार ने इस मांग को लेकर दायर याचिका का विरोध किया और कहा कि कानून में पहले से ही एक संतुलित सजा का प्रावधान है. केंद्र ने अपने हलफनामे में कहा, ‘ताउम्र प्रतिबंध उचित होगा या नहीं, यह पूरी तरह से संसद का विषय है.’ सरकार ने तर्क दिया कि सजा की अवधि सीमित रखने से संतुलन बना रहता है और यह न्यायिक कठोरता को भी रोकता है.

दागी सांसदों-विधायकों पर लाइफटाइम बैन की डिमांड

यह याचिका अधिवक्ता अश्विनी कुमार उपाध्याय ने दायर की थी. उन्होंने सुप्रीम कोर्ट से मांग की कि सांसदों और विधायकों पर आजीवन प्रतिबंध लगाया जाए और उनके खिलाफ आपराधिक मामलों का निपटारा जल्द हो. इसके जवाब में केंद्र ने कहा कि “न्यायिक समीक्षा” की सीमाएं होती हैं और अदालत कानून की प्रभावशीलता के आधार पर संसद के फैसले को चुनौती नहीं दे सकती. केंद्र के हलफनामे में कहा गया, “अपराधों पर प्रतिबंध की अवधि संसद की नीति का हिस्सा है. इसे चुनौती देकर आजीवन प्रतिबंध थोपना सही नहीं होगा.”

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