बस्ती में राजनीति: ब्राह्मण समाज के संघर्ष और एकता की पुकार

बस्ती जिले में हालिया राजनीतिक घटनाक्रम ने ब्राह्मण समाज को झकझोर कर रख दिया है। सत्ता में बैठे लोगों की मनमानी और प्रशासनिक तानाशाही के कारण आमजन को थानों में धरना देने तक की नौबत आ रही है। ऐसी स्थिति में जनता का आक्रोश भड़कना स्वाभाविक है। यदि स्थानीय नेतृत्व ने जनता की आवाज़ को नजरअंदाज किया, तो भविष्य में राजनीतिक समीकरण पूरी तरह बदल सकते हैं।
भविष्य में भाजपा को नुकसान?
बस्ती में भारतीय जनता पार्टी ने पिछली बार एक सीट पर जीत दर्ज की थी, लेकिन यदि जनता की नाराजगी इसी तरह बढ़ती रही, तो आगामी चुनाव में यह सीट भी हाथ से निकल सकती है। जनता अब अपने अधिकारों को लेकर सजग हो चुकी है और अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने को तैयार है।
स्वर्गीय आदर्श उपाध्याय की पुलिस हिरासत में बर्बर पिटाई
ग्राम उभाई, थाना दुबौलिया में पुलिस हिरासत में स्वर्गीय आदर्श उपाध्याय की बर्बरता से पिटाई के बाद हुई मौत ने पूरे ब्राह्मण समाज को झकझोर दिया है। यह घटना प्रशासन की क्रूरता और सत्ता की निरंकुशता का जीता-जागता उदाहरण है। आदर्श उपाध्याय की मौत से समाज में गहरा आक्रोश है, लेकिन इस अन्याय के खिलाफ आवाज़ उठाने वालों को राजनीतिक दबाव और प्रशासनिक धमकियों का सामना करना पड़ रहा है।
ब्राह्मण समाज को अब आत्ममंथन करने की जरूरत है। उन्हें यह समझना होगा कि एकजुटता ही उनकी ताकत है। समाज को एक ऐसा नेता चाहिए, जो हर परिस्थिति में उनके साथ खड़ा हो—चाहे सुख का समय हो या दुख की घड़ी। प्रवीण पाठक का योगदान इसका प्रत्यक्ष उदाहरण है, जो दिन-रात समाज के लिए संघर्षरत हैं।
पुलिस ज्यादती और प्रशासन का अन्याय
हाल ही में घटित आदर्श उपाध्याय की पुलिस हिरासत में मौत ने प्रशासन की अमानवीयता को उजागर कर दिया है। पुलिस की बर्बरता ने एक मासूम परिवार को उजाड़ दिया, लेकिन इसके बावजूद प्रशासन ने घटना को दबाने का प्रयास किया।
ब्राह्मण समाज को अब इस अन्याय के खिलाफ खड़ा होना होगा। पीड़ित परिवार को आर्थिक, सामाजिक और कानूनी सहायता प्रदान की जानी चाहिए, ताकि न्याय की लड़ाई में वे अकेले न रहें।
विधानसभा में मुद्दा उठाने की मांग
इस मामले में प्रवीण पाठक ने विपक्ष के नेता माता प्रसाद पांडे से बात की और आग्रह किया कि इस मुद्दे को विधानसभा में उठाया जाए। समाज को भी इस प्रयास का समर्थन करना चाहिए ताकि अन्याय के खिलाफ आवाज़ बुलंद की जा सके।
बस्ती का ब्राह्मण समाज अब चुप नहीं रह सकता। उन्हें एकजुट होकर अपने अधिकारों और सम्मान की रक्षा के लिए आगे आना होगा। यह समय है कि समाज एक आवाज़ में बोले और अन्याय का पुरजोर विरोध करे, ताकि भविष्य में कोई भी समुदाय के सम्मान के साथ खिलवाड़ करने की हिम्मत न कर सके।