IAS अभिषेक प्रकाश की बढ़ी मुश्किलें, डीएम से लेकर तहसीलदार तक फंसे; अब ये अफसर होंगे सस्पेंड

लखनऊ। डिफेंस कारिडोर भूमि अधिग्रहण घोटाले में फंसे तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश की मुश्किलें और बढ़ गई हैं। डिफेंस कारिडोर भूमि घोटाले में भी उनके विरुद्ध कार्रवाई की जाएगी। इसी मामले में 15 अन्य अधिकारियों को दोषी ठहराया गया है।
इनमें एक तत्कालीन एडीएम, चार एसडीएम, चार तहसीलदार, एक नायब तहसीलदार, तीन कानूनगो व दो लेखपाल शामिल हैं। इनके निलंबन के आदेश एक दो दिनों में जारी किए जाएंगे। इस संबंध में मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने कार्रवाई के निर्देश जारी कर दिए हैं।
उन्होंने घोटाले में शामिल भूमाफिया के विरुद्ध भी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। इनसे मुआवजे की राशि भी वसूली जाएगी। प्रदेश में सौर ऊर्जा संयंत्र स्थापित करने के लिए एसएईएल सोलर पी6 प्राइवेट लिमिटेड से कमीशन के आरोप में अभिषेक प्रकाश को बीते दिनों निलंबित किया जा चुका है।
डिफेंस कारिडोर के लिए लखनऊ की सरोजनी नगर तहसील में भटगांव ग्राम पंचायत की भूमि अधिग्रहण में किए गए घोटाले की जांच मुख्यमंत्री ने राजस्व परिषद के तत्कालीन अध्यक्ष डा. रजनीश दुबे से कराई थी। बीते वर्ष अगस्त माह में शासन को भेजी गई।
83 पन्नों की जांच रिपोर्ट में अभिषेक प्रकाश सहित 18 अधिकारियों को आरोपित बनाया था। जांच में सुनियोजित षडयंत्र के तहत किए गए घोटाले में क्रय समिति के अध्यक्ष और तत्कालीन तहसीलदार सरोजनी नगर को सीधे तौर पर जिम्मेदार ठहराया गया था।
कारिडोर में ईकाइयों की स्थापना के लिए वर्ष 2020-21 ब्रम्होस मिसाइल के अलावा रक्षा क्षेत्र से जुड़ी कई कंपनियां भूमि की तलाश रही थीं। इसके चलते भटगांव में भू-माफियाओं ने भूमि की दरें बढ़ा दी थीं। साथ ही अधिकारियों के साथ सांठगांठ करके अधिग्रहण प्रक्रिया में फर्जी तरीके से दस्तावेजों में हेरफेर कर आवंटियों के नाम जोड़े गए थे।
आरोपित अधिकारियों ने नियमों की अनदेखी कर पट्टे की असंक्रमणीय श्रेणी की भूमि को संक्रमणीय घोषित कर दिया था। भूखंडों पर जिन लोगों का कब्जा ही नहीं था उनको भी भूखंडों का मालिक बताया गया था। अधिकारियों ने मालिकाना हक की जांच के बिना ही मुआवजा वितरित कर दिया था।
भटगांव की करीब 35 हेक्टेयर भूमि के लिए 45.18 करोड़ रुपये शासन ने स्वीकृत किए थे। जांच में यह भी सामने आया था कि सरोजनी नगर तहसील में तैनात तत्कालीन अफसरों ने अपने रिश्तेदारों और नौकरों तक को भूमि दिलाकर करोड़ों रुपये मुआवजा हड़पा था। भू-माफिया ने किसानों से आठ लाख में भूमि खरीद कर 54 लाख रुपये में बेची थी।
जांच में 90 पट्टे फर्जी पाए गए थे। इनमें 11 व्यक्तियों के नाम पट्टे में दर्ज ही नहीं थे। भू-माफिया ने 35 वर्ष पुराना पट्टा दिखाकर पट्टों को संक्रमणीय भूमिधर जमीन घोषित कराया और 20 करोड़ रुपये का मुआवजा हड़प लिया था। घोटाले का राजफाश होने के बाद तत्कालीन डीएम अभिषेक प्रकाश ने कानूनगो जितेंद्र सिंह को तत्काल प्रभाव से निलंबित कर दिया था।
इन अधिकारियों को किया जाएगा निलंबित
घोटाले में तत्कालीन एडीएम (प्रशासन) अमरपाल सिंह को भी दोषी ठहराया गया है। इसके अलावा तत्कालीन एसडीएम संतोष कुमार सिंह, शंभू शरण सिंह, आनंद कुमार सिंह, देवेंद्र कुमार को भी दोषी ठहराया गया है। वहीं चार तत्कालीन तहसीलदार विजय कुमार सिंह, ज्ञानेंद्र सिंह, उमेश कुमार सिंह व मनीष त्रिपाठी के विरुद्ध भी कार्रवाई के निर्देश दिए गए हैं।
तत्कालीन नायब तहसीलदार कविता ठाकुर, तत्कालीन लेखपाल हरीश्चंद्र व ज्ञान प्रकाश को भी दोषी ठहराया गया है। तत्कालीन कानूनगो राधेश्याम व जितेंद्र सिंह तथा नैंसी शुक्ला के विरुद्ध भी कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं।
सब रजिस्ट्रार कार्यालय के कर्मचारियों पर भी लटकी तलवार
घोटाले को लेकर सरोजनी नगर सब रजिस्ट्रार कार्यालय में उस वक्त तैनात कर्मचारियों पर भी कार्रवाई की जाएगी। मुख्यमंत्री ने घोटाले में शामिल सभी कर्मचारियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई के निर्देश दिए हैं। घोटाले की प्रारम्भिक जांच में मंडलायुक्त ने भी इसे सुनियोजित षडयंत्र बताया था।
बद्री पुत्र रामचरण के वारिसान रामकली ने बयान दिए थे कि राामसजीवन ने उन्हें पांच लाख रुपये देकर बैनामे पर अंगूठा लगवा लिया था। इसी प्रकार बाबूलाल की भूमि 19 अगस्त 2021 को असंक्रमणीय घोषित की गई थी, जबकि उससे पहले ही सूरज मिश्रा को विक्रय अनुबंध कर दिया गया था।
इसी प्रकार अंकित के वारिसान ने भूमि संक्रमणीय घोषित होने से पहले ही विक्रय अनुबंध कर लिया था। डिफेंस कारिडोर की सीमा के भीतर कुल नौ नंबरों (गाटा संख्या) और उस सीमा के बाहर 31 नंबरों की जमीन ऐसी थी, जो श्रेणी-5 (3 क) के अंतर्गत कृषि योग्य बंजर-इमारती लकड़ी के वन के रूप में दर्ज है।
इसे किसी निजी व्यक्ति के नाम नहीं किया जा सकता। वहीं डिफेंस कारिडोर के लिए भूमि खरीदने वाली संस्था यूपीडा को जिस विक्रेता ने जमीन बेची, बिक्री की तिथि को उसका नाम भी खतौनी में दर्ज नहीं था। विजय कुमार को 14 जून 2021 को संक्रमणीय भूमिधर घोषित किया गया।
उन्होंने इस भूमि को 5.20 लाख रुपये में राजू को बेचा था। राजू ने वरुण कुमार मिश्रा और उनकी पत्नी सरिता सिंह को 14.50 लाख रुपये में भूमि बेची थी, जिसे बाद में सरिता और वरुण ने 13 जुलाई को यूपीडा को 57.60 लाख रुपये में बेच दिया।