वक्फ बिल का विरोध क्यों

Update: 2025-04-02 04:31 GMT

वक्फ (संशोधन) विधेयक, 2024 का विरोध  मुख्य रूप से विपक्षी दलों, मुस्लिम संगठनों और कुछ सामाजिक समूहों की आपत्तियों पर आधारित हैं। नीचे इसके प्रमुख कारण दिए गए हैं:

धार्मिक स्वतंत्रता में हस्तक्षेप का आरोप:

विपक्षी नेता, जैसे AIMIM के असदुद्दीन ओवैसी और कांग्रेस के सांसद, का कहना है कि यह बिल संविधान के अनुच्छेद 14 (समानता), 15 (भेदभाव से सुरक्षा) और 25 (धार्मिक स्वतंत्रता) का उल्लंघन करता है। उनका तर्क है कि सरकार इस बिल के जरिए मुस्लिम समुदाय के धार्मिक मामलों में दखल दे रही है।

वक्फ बोर्ड की स्वायत्तता पर सवाल:

बिल में वक्फ बोर्ड में गैर-मुस्लिम सदस्यों को शामिल करने और कलेक्टर को वक्फ संपत्तियों के सर्वेक्षण का अधिकार देने जैसे प्रावधान हैं। विरोधियों का मानना है कि इससे वक्फ बोर्ड की स्वतंत्रता खत्म हो जाएगी और यह सरकार के नियंत्रण में आ जाएगा।

संपत्ति के दावों पर विवाद:

पहले वक्फ बोर्ड बिना दान के भी संपत्ति पर दावा कर सकता था, लेकिन नए बिल में यह प्रावधान बदल दिया गया है। साथ ही, सरकारी संपत्तियों को वक्फ से बाहर करने का नियम है। विरोधी पक्ष का कहना है कि इससे मौजूदा वक्फ संपत्तियों पर असर पड़ेगा और यह मुस्लिम समुदाय की संपत्ति को कमजोर करेगा।

राजनीतिक उद्देश्य का आरोप:

समाजवादी पार्टी के अखिलेश यादव और अन्य विपक्षी नेताओं का दावा है कि बीजेपी इस बिल के जरिए मुस्लिम समुदाय को निशाना बना रही है और इसका मकसद धार्मिक आधार पर समाज को बांटना है। उनका कहना है कि यह हिंदुत्व की विचारधारा को बढ़ावा देने की कोशिश है।

विपक्ष के सुझावों को नजरअंदाज करना:

संयुक्त संसदीय समिति (जेपीसी) में विपक्ष ने 44 संशोधन सुझाए थे, जिन्हें खारिज कर दिया गया। कांग्रेस सांसद सैयद नसीर हुसैन जैसे नेताओं का आरोप है कि उनकी असहमति को दबाया गया, जिससे बिल को एकतरफा माना जा रहा है।

मुस्लिम समुदाय में डर:

ऑल इंडिया मुस्लिम पर्सनल लॉ बोर्ड (AIMPLB) और अन्य संगठनों का कहना है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों को कमजोर करेगा, जो मुस्लिम समुदाय के लिए धार्मिक और सामाजिक कार्यों का आधार हैं। उनका मानना है कि इससे समुदाय के अधिकार छिन जाएंगे।

हालांकि, सरकार का तर्क है कि यह बिल वक्फ संपत्तियों में पारदर्शिता लाने, भ्रष्टाचार रोकने और मुस्लिम महिलाओं व बच्चों के कल्याण के लिए है। फिर भी, इन बदलावों को लेकर विपक्ष और समुदाय का एक बड़ा हिस्सा असहमत है, जिसके चलते इसका विरोध जारी है।

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